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Currently viewing: Parva 8 -
Chapter 8.54
(29 verses)
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Sanskrit Text
ततो
धीमान्सारथिमब्रवीद्बली;
स
भीमसेनः
पुनरेव
हृष्टः
।
सूताभिजानीहि
परान्स्वकान्वा;
रथान्ध्वजांश्चापततः
समेतान्
।
युध्यन्नहं
नाभिजानामि
किंचि;न्मा
सैन्यं
स्वं
छादयिष्ये
पृषत्कैः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ततो | धीमान् | सारथिम् | अब्रवीद् | बली | स | भीमसेनः | पुनर् | एव | हृष्टः
सूत + अभिज्ञा | परान् | स्वकान् | वा | रथान् | ध्वजांश् | च + आपत् | समेतान्
युध्यन्न् | अहं | न + अभिज्ञा | किंचिन् | मा | सैन्यं | स्वं | छादयिष्ये | पृषत्कैः
सूत + अभिज्ञा | परान् | स्वकान् | वा | रथान् | ध्वजांश् | च + आपत् | समेतान्
युध्यन्न् | अहं | न + अभिज्ञा | किंचिन् | मा | सैन्यं | स्वं | छादयिष्ये | पृषत्कैः