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Currently viewing: Parva 8 -
Chapter 8.49
(116 verses)
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Sanskrit Text
इत्येवमुक्त्वा
पुनराह
पार्थो;
युधिष्ठिरं
धर्मभृतां
वरिष्ठम्
।
अप्यपुत्रा
तेन
राधा
भवित्री;
कुन्ती
मया
वा
तदृतं
विद्धि
राजन्
।
प्रसीद
राजन्क्षम
यन्मयोक्तं;
काले
भवान्वेत्स्यति
तन्नमस्ते
॥
Padaccheda (Word Analysis)
इत्य् | एवम् | उक्त्वा | पुनर् | आह | पार्थो | युधिष्ठिरं | धर्म + भृत् | वरिष्ठम्
अप्य् | अपुत्रा | तेन | राधा | भवित्री | कुन्ती | मया | वा | तद् | ऋतं | विद्धि | राजन्
प्रसीद | राजन् | क्षम | यन् | मद् + वच् | काले | भवान् | वेत्स्यति | तन् | नमस् | ते
अप्य् | अपुत्रा | तेन | राधा | भवित्री | कुन्ती | मया | वा | तद् | ऋतं | विद्धि | राजन्
प्रसीद | राजन् | क्षम | यन् | मद् + वच् | काले | भवान् | वेत्स्यति | तन् | नमस् | ते