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Currently viewing: Parva 8 -
Chapter 8.49
(116 verses)
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Sanskrit Text
तव
प्रियार्थं
मम
जीवितं
हि;
ब्रवीमि
सत्यं
तदवेहि
राजन्
।
इति
प्रायादुपसंगृह्य
पादौ;
समुत्थितो
दीप्ततेजाः
किरीटी
।
नेदं
चिरात्क्षिप्रमिदं
भविष्य;त्यावर्ततेऽसावभियामि
चैनम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तव | प्रिय + अर्थ | मम | जीवितं | हि | ब्रवीमि | सत्यं | तद् | अवेहि | राजन्
इति | प्रायाद् | उपसंगृह्य | पादौ | समुत्थितो | दीप् + तेजस् | किरीटी
न + इदम् | चिरात् | क्षिप्रम् | इदं | भविष्यत्य् | आवर्तते | ऽसाव् | अभियामि | च + एनद्
इति | प्रायाद् | उपसंगृह्य | पादौ | समुत्थितो | दीप् + तेजस् | किरीटी
न + इदम् | चिरात् | क्षिप्रम् | इदं | भविष्यत्य् | आवर्तते | ऽसाव् | अभियामि | च + एनद्