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Currently viewing: Parva 8 -
Chapter 8.43
(78 verses)
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Sanskrit Text
मृद्नन्ति
च
नरव्याघ्रा
भीमसेनव्यपाश्रयात्
।
बलं
परेषां
दुर्धर्षं
त्यक्त्वा
प्राणानरिंदम
॥
Padaccheda (Word Analysis)
मृद्नन्ति | च | नर + व्याघ्र | भीमसेन + व्यपाश्रय
बलं | परेषां | दुर्धर्षं | त्यक्त्वा | प्राणान् | अरिंदम
बलं | परेषां | दुर्धर्षं | त्यक्त्वा | प्राणान् | अरिंदम