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Currently viewing: Parva 8 -
Chapter 8.43
(78 verses)
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Sanskrit Text
पञ्च
नागसहस्राणि
द्विगुणा
वाजिनस्तथा
।
अभिसंहत्य
कौन्तेय
पदातिप्रयुतानि
च
।
अन्योन्यरक्षितं
वीर
बलं
त्वामभिवर्तते
॥
Padaccheda (Word Analysis)
पञ्च | नाग + सहस्र | द्विगुणा | वाजिनस् | तथा
अभिसंहत्य | कौन्तेय | पदाति + प्रयुत | च
अन्योन्य + रक्ष् | वीर | बलं | त्वाम् | अभिवर्तते
अभिसंहत्य | कौन्तेय | पदाति + प्रयुत | च
अन्योन्य + रक्ष् | वीर | बलं | त्वाम् | अभिवर्तते