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Currently viewing: Parva 8 -
Chapter 8.35
(60 verses)
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Sanskrit Text
श्रुतायुर्दुर्धरः
क्राथो
विवित्सुर्विकटः
समः
।
निषङ्गी
कवची
पाशी
तथा
नन्दोपनन्दकौ
॥
Padaccheda (Word Analysis)
श्रुतायुर् | दुर्धरः | क्राथो | विवित्सुर् | विकटः | समः
निषङ्गी | कवची | पाशी | तथा | नन्द + उपनन्दक
निषङ्गी | कवची | पाशी | तथा | नन्द + उपनन्दक