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Currently viewing: Parva 7 -
Chapter 7.77
(38 verses)
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Sanskrit Text
दिष्ट्या
त्विदानीं
संप्राप्त
एष
ते
बाणगोचरम्
।
स
यथा
जीवितं
जह्यात्तथा
कुरु
धनंजय
॥
Padaccheda (Word Analysis)
दिष्ट्या | तु + इदानीम् | सम्प्राप्त | एष | ते | बाण + गोचर
स | यथा | जीवितं | जह्यात् | तथा | कुरु | धनंजय
स | यथा | जीवितं | जह्यात् | तथा | कुरु | धनंजय