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Currently viewing: Parva 7 -
Chapter 7.65
(32 verses)
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Sanskrit Text
महोर्मिणमिवोद्धूतं
श्वसनेन
महार्णवम्
।
किरीटी
तद्गजानीकं
प्राविशन्मकरो
यथा
॥
Padaccheda (Word Analysis)
महत् + ऊर्मिन् | इव + उद्धू | श्वसनेन | महत् + अर्णव
किरीटी | तद् | गज + अनीक | प्रविश् + मकर | यथा
किरीटी | तद् | गज + अनीक | प्रविश् + मकर | यथा