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Currently viewing: Parva 7 -
Chapter 7.31
(77 verses)
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Sanskrit Text
ततो
बले
भृशलुलिते
परस्परं;
निरीक्षमाणे
रुधिरौघसंप्लुते
।
दिवाकरेऽस्तंगिरिमास्थिते
शनै;रुभे
प्रयाते
शिबिराय
भारत
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ततो | बले | भृश + लुल् | परस्परं | निरीक्षमाणे | रुधिर + ओघ + सम्प्लु
दिवाकरे | अस्त + गिरि | आस्थिते | शनैर् | उभे | प्रयाते | शिबिराय | भारत
दिवाकरे | अस्त + गिरि | आस्थिते | शनैर् | उभे | प्रयाते | शिबिराय | भारत