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Currently viewing: Parva 7 - Chapter 7.144 (42 verses)
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Chapter 7.144

नकुलं रभसं युद्धे निघ्नन्तं वाहिनीं तव अभ्ययात्सौबलः क्रुद्धस्तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रवीत्
Sanjaya said The son of Subala (i.e. Shakuni), excited with wrath, rushed against Nakula who was slaughtering your troops with (great) impetuosity in battle and said (to him) “Wait, wait."
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नकुलं | रभसं | युद्धे | निघ्नन्तं | वाहिनीं | तव
क्रोधम् | आहारयत् | तीव्रं | तिष्ठ | स्था + इति | च + ब्रू
कृतवैरौ तु तौ वीरावन्योन्यवधकाङ्क्षिणौ शरैः पूर्णायतोत्सृष्टैरन्योन्यमभिजघ्नतुः
Those two heroes, between whom was excited a bitter enmity, desirous of slaying each other, struck each other with arrows discharged (from their bows) drawn to their fullest stretch.
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कृ + वैर | तु | तौ | वीर + अन्योन्य + वध + काङ्क्षिन्
शरैः | पृ + आयम् + उत्सृज् | अन्योन्यम् | अभिजघ्नतुः
यथैव सौबलः क्षिप्रं शरवर्षाणि मुञ्चति तथैव नकुलो राजञ्शिक्षां संदर्शयन्युधि
In (that) battle, O king, the son of Subala displayed as much dexterity in discharging showers of arrows as Nakula (god).
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यथा + एव | सौबलः | क्षिप्रं | शर + वर्ष | मुञ्चति
तथा + एव | नकुलो | राजञ् | शिक्षां | संदर्शयन् | युधि
तावुभौ समरे शूरौ शरकण्टकिनौ तदा व्यराजेतां महाराज कण्टकैरिव शाल्मली
O great king, those two heroes mangled with shafts and their bodies looking prickly with the darts sticking io them, looked beautiful like a couple of hedgehogs with their quills erect on their bodies, in that encounter.
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तद् + उभ् | शर + नुद् + अङ्ग | शर + कण्टकिन् | रणे
व्यभ्राजेतां | महत् + राज | श्वाविधौ | शललैर् | इव
सुजिह्मं प्रेक्षमाणौ राजन्विवृतलोचनौ क्रोधसंरक्तनयनौ निर्दहन्तौ परस्परम्
O king, looking delightedly at each other with expanded eyes which became red in wrath, they seemed to consume each other (with their fiery glances).
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सु + जिह्म | प्रेक्षमाणौ | च | राजन् | विवृ + लोचन
क्रोध + संरञ्ज् + नयन | निर्दहन्तौ | परस्परम्
स्यालस्तु तव संक्रुद्धो माद्रीपुत्रं हसन्निव कर्णिनैकेन विव्याध हृदये निशितेन
Inflamed with wrath, your brother-in-law, pierced, as it were with a smile, the son of Madri in the chest with keen and barbed dart.
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स्याल + तु | तव | संक्रुद्धो | माद्री + पुत्र | हसन्न् | इव
कर्णिन् + एक | विव्याध | हृदये | निशितेन | ह
नकुलस्तु भृशं विद्धः स्यालेन तव धन्विना निषसाद रथोपस्थे कश्मलं चैनमाविशत्
Your brother-in-law wielder of bow, wounded Nakula extremely. He fell down on his chariot and filled with very grief.
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नकुल + तु | भृशं | विद्धः | स्यालेन | तव | धन्विना
निषसाद | रथोपस्थे | द्रोणो | भरत + सत्तम
अत्यन्तवैरिणं दृप्तं दृष्ट्वा शत्रुं तथागतम् ननाद शकुनी राजंस्तपान्ते जलदो यथा
Beholding his bitter and haughty foe in that (pitiable) plight, Shakuni roared there like the clouds at the end of summer.
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अत्यन्त + वैरिन् | दृप्तं | दृष्ट्वा | शत्रुं | तथागतम्
ननाद | सु + महत् + नाद | तपान्ते | जलदो | यथा
प्रतिलभ्य ततः संज्ञां नकुलः पाण्डुनन्दनः अभ्ययात्सौबलं भूयो व्यात्तानन इवान्तकः
Then, Nakula, the son of Pandu, recovering his senses once again rushed against the son of Subala like death itself with gaping mouth.
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प्रतिलभ्य | ततः | संज्ञां | नकुलः | पाण्डु + नन्दन
अभ्ययात् | सौबलं | भूयो | व्यात्त + आनन | इव + अन्तक
संक्रुद्धः शकुनिं षष्ट्या विव्याध भरतर्षभ पुनश्चैव शतेनैव नाराचानां स्तनान्तरे
He, (then), O best of the Bharatas, wrathfully pierced Shakuni with six (arrows) and again with a hundred long shafts, in the centre of the chest.
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संक्रुद्धः | शकुनिं | षष्ट्या | विव्याध | भरत + ऋषभ
पुनर् + च + एव | शत + एव | नाराचानां | स्तनान्तरे
ततोऽस्य सशरं चापं मुष्टिदेशे चिच्छिदे ध्वजं त्वरितं छित्त्वा रथाद्भूमावपातयत्
(He then cut-off) his bow with the arrow fixed (on the string) into two fragments, at the points at which it is grasped. (Then), quickly cutting off his standard, (he) caused it to fall from his car to the ground.
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ततो | ऽस्य | स + शर | चापं | मुष्टिदेशे | स | चिच्छिदे
ध्वजं | च | त्वरितं | छित्त्वा | रथाद् | भूमि + पातय्
सोऽतिविद्धो महाराज रथोपस्थ उपाविशत् तं विसंज्ञं निपतितं दृष्ट्वा स्यालं तवानघ अपोवाह रथेनाशु सारथिर्ध्वजिनीमुखात्
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सो | ऽतिविद्धो | महत् + राज | रथोपस्थ | उपाविशत्
तं | विसंज्ञं | निपतितं | दृष्ट्वा | स्यालं | त्वद् + अनघ
अपोवाह | रथ + आशु | सारथिर् | ध्वजिनी + मुख
ततः संचुक्रुशुः पार्था ये तेषां पदानुगाः निर्जित्य रणे शत्रून्नकुलः शत्रुतापनः अब्रवीत्सारथिं क्रुद्धो द्रोणानीकाय मां वह
On the defeat of his foe in battle, Nakula. the scorcher of foes, said to his charioteer "convey me towards Drona's division."
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ततः | संचुक्रुशुः | पार्था | ये | च | तेषां | पदानुगाः
निर्जित्य | च | रणे | शत्रु + नकुल | शत्रु + तापन
स्व + सूत | अब्रवीत् | क्रुद्धो | द्रोणपुत्राय | मां | वह
तस्य तद्वचनं श्रुत्वा माद्रीपुत्रस्य धीमतः प्रायात्तेन रणे राजन्येन द्रोणोऽन्वयुध्यत
Hearing those words of the son of Madri, his charioteer, conveyed him to the spot where, O king, Drona took his stand.
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तस्य | तद् | वचनं | श्रुत्वा | माद्री + पुत्र | धीमतः
प्रायात् | तेन | रणे | राजन् | येन | द्रोणो | ऽन्वयुध्यत
शिखण्डिनं तु समरे द्रोणप्रेप्सुं विशां पते कृपः शारद्वतो यत्तः प्रत्युद्गच्छत्सुवेगितः
Kripa, the son of Saradvata, rushed with great impetuosity and resoluteness, against the highly-powerful Sikhandi who was advancing in order to slay Drona.
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सहदेवम् | अथ + आया | द्रोण + प्रेप्सु | विशां | पते
दुःशासन + त्वद् | सुतः | प्रत्युद्गम् + महत् + रथ
गौतमं द्रुतमायान्तं द्रोणान्तिकमरिंदमम् विव्याध नवभिर्भल्लैः शिखण्डी प्रहसन्निव
Sikhandi, the subduer of foes, pierced as it were with a smile the son of Goutama advancing furiously (again him) towards the vicinity of Drona, with nine arrows.
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गौतमं | द्रुतम् | आयान्तं | द्रोण + अन्तिक | अरिंदमम्
विव्याध | नवभिर् | भल्लैः | शिखण्डी | प्रहसन्न् | इव
तमाचार्यो महाराज विद्ध्वा पञ्चभिराशुगैः पुनर्विव्याध विंशत्या पुत्राणां प्रियकृत्तव
The preceptor, devoted to the welfare of your sons, having, O great monarch, pierced him with five shafts, struck him again with twenty (more).
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युधिष्ठिर + तु | हार्दिक्यं | विद्ध्वा | पञ्चभिर् | आशुगैः
दुर्योधनो | ऽपि | विंशत्या | शराणां | प्रत्यविध्यत
महद्युद्धं तयोरासीद्घोररूपं विशां पते यथा देवासुरे युद्धे शम्बरामरराजयोः
(Then), O lord of the earth, the encounter that ensued between them was as dreadful as that between the (Asura) Samvara and the lord of the immortals in the war between the celestials and the Asuras.
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महद् | युद्धं | तयोर् | आसीद् | घोर + रूप | विशां | पते
यथा | देवासुरे | युद्धे | शक्रस्य | सह | दानवैः
शरजालावृतं व्योम चक्रतुस्तौ महारथौ प्रकृत्या घोररूपं तदासीद्घोरतरं पुनः
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शर + जाल + आवृ | व्योम | कृ + तद् | महत् + रथ
प्रकृत्या | घोर + रूप | तद् | आसीद् | घोरतरं | पुनः
रात्रिश्च भरतश्रेष्ठ योधानां युद्धशालिनाम् कालरात्रिनिभा ह्यासीद्घोररूपा भयावहा
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रात्रि + च | भरत + श्रेष्ठ | योधानां | युद्ध + शालिन्
कालरात्रि + निभ | हि + अस् | घोर + रूप | भय + आवह
शिखण्डी तु महाराज गौतमस्य महद्धनुः अर्धचन्द्रेण चिच्छेद सज्यं सविशिखं तदा
That awfully-dreadful night striking terror (into very heart) seemed to be the death-night (of all the combatants). Then, O great monarch, Shikandi cut-off the great bow of the son of Goutama with a crescent-shaped (dart) and poured down sharpened arrows (at him). Kripa, then, O monarch, excited with rage, hurled a formidable dart.
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शिखण्डी | तु | महत् + राज | गौतमस्य | महद् | धनुः
अर्धचन्द्रेण | चिछेद | माधवस्य | महद् | धनुः
तस्य क्रुद्धः कृपो राजञ्शक्तिं चिक्षेप दारुणाम् स्वर्णदण्डामकुण्ठाग्रां कर्मारपरिमार्जिताम्
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तस्य | क्रुद्धः | कृपो | राजञ् | शक्तिं | चिक्षेप | दारुणाम्
स्वर्ण + दण्ड | अकुण्ठ + अग्र | कर्मार + परिमार्जय्
तामापतन्तीं चिच्छेद शिखण्डी बहुभिः शरैः सापतन्मेदिनीं दीप्ता भासयन्ती महाप्रभा
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ताम् | आपतन्तीं | चिछेद | शिखण्डी | बहुभिः | शरैः
तद् + पत् + मेदिनी | दीप्ता | भासयन्ती | महत् + प्रभा
अथान्यद्धनुरादाय गौतमो रथिनां वरः प्राच्छादयच्छितैर्बाणैर्महाराज शिखण्डिनम्
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अथ + अन्य | धनुर् | आदाय | सोमदत्तो | महत् + रथ
प्रच्छादय् + शा | बाणैर् | महत् + राज | शिखण्डिनम्
छाद्यमानः समरे गौतमेन यशस्विना व्यषीदत रथोपस्थे शिखण्डी रथिनां वरः
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स | छाद्यमानः | समरे | द्रौणिना | युद्ध + दुर्मद
व्यषीदत | रथोपस्थे | शिखण्डी | रथिनां | वरः
सीदन्तं चैनमालोक्य कृपः शारद्वतो युधि आजघ्ने बहुभिर्बाणैर्जिघांसन्निव भारत
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सीदन्तं | च + एनद् | आलोक्य | कृपः | शारद्वतो | युधि
आजघ्ने | बहुभिर् | बाणैर् | जिघांसन्न् | इव | भारत
विमुखं तं रणे दृष्ट्वा याज्ञसेनिं महारथम् पाञ्चालाः सोमकाश्चैव परिवव्रुः समन्ततः
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विमुखं | तं | रणे | दृष्ट्वा | याज्ञसेनिं | महत् + रथ
पाञ्चालान् | सोमक + च + एव | जहि | द्रौणे | सह + अनुग
तथैव तव पुत्राश्च परिवव्रुर्द्विजोत्तमम् महत्या सेनया सार्धं ततो युद्धमभूत्पुनः
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तथा + एव | तव | पुत्र + च | परिवव्रुर् | द्विजोत्तमम्
महत्या | सेनया | सार्धं | जग्मुर् | द्रोण + रथ | प्रति
रथानां रणे राजन्नन्योन्यमभिधावताम् बभूव तुमुलः शब्दो मेघानां नदतामिव
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रथानां | च | रणे | राजन्न् | अन्योन्यम् | अभिधावताम्
बभूव | तुमुलः | शब्दो | मेघानां | नदताम् | इव
द्रवतां सादिनां चैव गजानां विशां पते अन्योन्यमभितो राजन्क्रूरमायोधनं बभौ
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द्रवतां | सादिनां | च + एव | गजानां | च | विशां | पते
अन्योन्यम् | अभितो | राजन् | क्रूरम् | आयोधनं | बभौ
पत्तीनां द्रवतां चैव पदशब्देन मेदिनी अकम्पत महाराज भयत्रस्तेव चाङ्गना
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पत्तीनां | द्रवतां | च + एव | पद + शब्द | मेदिनी
अकम्पत | महत् + राज | भय + त्रस् + इव | च + अङ्गना
रथा रथान्समासाद्य प्रद्रुता वेगवत्तरम् न्यगृह्णन्बहवो राजञ्शलभान्वायसा इव
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रथा | रथान् | समासाद्य | प्रद्रुता | वेगवत्तरम्
न्यगृह्णन् | बहवो | राजञ् | शलभान् | वायसा | इव
तथा गजान्प्रभिन्नांश्च सुप्रभिन्ना महागजाः तस्मिन्नेव पदे यत्ता निगृह्णन्ति स्म भारत
And, O king, attacked numerous (other carwarriors), as crows (attack) winged insects. In the same manner, elephants, with the juice trickling down their bodies, resolutely attacked great elephants (of the opposite side) with juice trickling down their bodies, O Bharata. Horsemen approaching horsemen and foot soldiers (approaching) foot soldiers.
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तथा | गजान् | प्रभिद् + च | सु + प्रभिद् | महत् + गज
तस्मिन् | एव | पदे | यत्ता | निगृह्णन्ति | स्म | भारत
सादी सादिनमासाद्य पदाती पदातिनम् समासाद्य रणेऽन्योन्यं संरब्धा नातिचक्रमुः
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सादी | सादिनम् | आसाद्य | पदाती | च | पदातिनम्
समासाद्य | रणे | ऽन्योन्यं | संरब्धा | न + अतिक्रम्
धावतां द्रवतां चैव पुनरावर्ततामपि बभूव तत्र सैन्यानां शब्दः सुतुमुलो निशि
In that battle, angrily encountered one another, without getting the better of one another. Terrific indeed as the sound caused by the rush, retreat and return of the combatants at dead of night. (Innumerable) blazing lamps placed upon cars, elephants and horses.
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धावतां | द्रवतां | च + एव | पुनर् | आवर्तताम् | अपि
बभूव | तत्र | सैन्यानां | शब्दः | सु + तुमुल | निशि
दीप्यमानाः प्रदीपाश्च रथवारणवाजिषु अदृश्यन्त महाराज महोल्का इव खाच्च्युताः
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दीप्यमानाः | प्रदीप + च | रथ + वारण + वाजिन्
अदृश्यन्त | महत् + राज | महत् + उल्का | इव | ख + च्यु
सा निशा भरतश्रेष्ठ प्रदीपैरवभासिता दिवसप्रतिमा राजन्बभूव रणमूर्धनि
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सा | निशा | भरत + श्रेष्ठ | प्रदीपैर् | अवभासिता
दिवस + प्रतिम | राजन् | बभूव | रण + मूर्धन्
आदित्येन यथा व्याप्तं तमो लोके प्रणश्यति तथा नष्टं तमो घोरं दीपैर्दीप्तैरलंकृतम्
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आदित्येन | यथा | व्याप्तं | तमो | लोके | प्रणश्यति
तथा | नष्टं | तमो | घोरं | दीपैर् | दीप्तैर् | अलंकृतम्
शस्त्राणां कवचानां मणीनां महात्मनाम् अन्तर्दधुः प्रभाः सर्वा दीपैस्तैरवभासिताः
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शस्त्राणां | कवचानां | च | मणीनां | च | महात्मनाम्
अन्तर्दधुः | प्रभाः | सर्वा | दीप + तद् | अवभासिताः
तस्मिन्कोलाहले युद्धे वर्तमाने निशामुखे अवधीत्समरे पुत्रं पिता भरतसत्तम
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तस्मिन् | कोलाहले | युद्धे | वर्तमाने | निशा + मुख
अवधीत् | समरे | पुत्रं | पिता | भरत + सत्तम
पुत्रश्च पितरं मोहात्सखायं सखा तथा संबन्धिनं संबन्धी स्वस्रीयं चापि मातुलः
Son (his) father and kinsmen (killed kinsmen, friends (slew) friends and maternal uncles (killed) sister's sons, through ignorance.
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पुत्र + च | पितरं | मोहात् | सखायं | च | सखा | तथा
संबन्धिनं | च | संबन्धी | स्वस्रीयं | च + अपि | मातुलः
स्वे स्वान्परे परांश्चापि निजघ्नुरितरेतरम् निर्मर्यादमभूद्युद्धं रात्रौ घोरं भयावहम्
(And) O Bharata, warrior killed warriors of the same party and enemies killed their own O king, in that awful nocturnal engagement (the combatants) lost all regard for one another. men.
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स्वे | स्वान् | परे | पर + च + अपि | निजघ्नुर् | इतरेतरम्
निर्मर्यादम् | अभूद् | युद्धं | रात्रौ | घोरं | भय + आवह