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Currently viewing: Parva 7 -
Chapter 7.131
(135 verses)
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Sanskrit Text
त्रिभिश्चान्यैः
शरैस्तीक्ष्णैः
सुपुङ्खै
रुक्ममालिनम्
।
शत्रुंजयं
च
बलिनं
शक्रलोकं
निनाय
ह
॥
Padaccheda (Word Analysis)
त्रि + च + अन्य | शर + तीक्ष्ण | सु + पुङ्ख | रुक्ममालिनम्
शत्रुंजयं | च | बलिनं | शक्र + लोक | निनाय | ह
शत्रुंजयं | च | बलिनं | शक्र + लोक | निनाय | ह