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Currently viewing: Parva 7 -
Chapter 7.108
(41 verses)
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Sanskrit Text
गच्छ
दुर्जय
राधेयं
पुरा
ग्रसति
पाण्डवः
।
जहि
तूबरकं
क्षिप्रं
कर्णस्य
बलमादधत्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
गच्छ | दुर्जय | राधेयं | पुरा | ग्रसति | पाण्डवः
जहि | तूबरकं | क्षिप्रं | कर्णस्य | बलम् | आदधत्
जहि | तूबरकं | क्षिप्रं | कर्णस्य | बलम् | आदधत्