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Currently viewing: Parva 7 -
Chapter 7.105
(36 verses)
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Sanskrit Text
तत्र
कृत्यमहं
मन्ये
सैन्धवस्याभिरक्षणम्
।
स
नो
रक्ष्यतमस्तात
क्रुद्धाद्भीतो
धनंजयात्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तत्र | कृत्यम् | अहं | मन्ये | सैन्धव + अभिरक्षण
स | नो | रक्ष्यतम + तात | क्रुद्धाद् | भीतो | धनंजयात्
स | नो | रक्ष्यतम + तात | क्रुद्धाद् | भीतो | धनंजयात्