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Currently viewing: Parva 7 -
Chapter 7.102
(105 verses)
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Sanskrit Text
ततो
निक्षिप्य
राजानं
धृष्टद्युम्नाय
पाण्डवः
।
अभिवाद्य
गुरुं
ज्येष्ठं
प्रययौ
यत्र
फल्गुनः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ततो | निक्षिप्य | राजानं | धृष्टद्युम्नाय | पाण्डवः
अभिवाद्य | गुरुं | ज्येष्ठं | प्रययौ | यत्र | फल्गुनः
अभिवाद्य | गुरुं | ज्येष्ठं | प्रययौ | यत्र | फल्गुनः