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Currently viewing: Parva 7 -
Chapter 7.102
(105 verses)
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Sanskrit Text
विदितं
ते
महाबाहो
यथा
द्रोणो
महारथः
।
ग्रहणे
धर्मराजस्य
सर्वोपायेन
वर्तते
॥
Padaccheda (Word Analysis)
विदितं | ते | महत् + बाहु | यथा | द्रोणो | महत् + रथ
ग्रहणे | धर्मराजस्य | सर्व + उपाय | वर्तते
ग्रहणे | धर्मराजस्य | सर्व + उपाय | वर्तते