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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.86
(86 verses)
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Sanskrit Text
ते
त्वदीयान्समासाद्य
हयसंघान्महाजवान्
।
क्रोडैः
क्रोडानभिघ्नन्तो
घोणाभिश्च
परस्परम्
।
निपेतुः
सहसा
राजन्सुवेगाभिहता
भुवि
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ते | त्वदीयान् | समासाद्य | हय + संघ + महत् + जव
क्रोडैः | क्रोडान् | अभिघ्नन्तो | घोणा + च | परस्परम्
उत्पेतुः | सहसा | राजन् | हंसा | इव | महोदधौ
क्रोडैः | क्रोडान् | अभिघ्नन्तो | घोणा + च | परस्परम्
उत्पेतुः | सहसा | राजन् | हंसा | इव | महोदधौ