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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.79
(55 verses)
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Sanskrit Text
स
शरः
प्रेषितस्तेन
गरुत्मानिव
वेगवान्
।
मद्रराजं
विनिर्भिद्य
निपपात
महीतले
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | शरः | प्रेषय् + तद् | गरुत्मान् | इव | वेगवान्
मद्र + राज | विनिर्भिद्य | निपपात | मही + तल
मद्र + राज | विनिर्भिद्य | निपपात | मही + तल