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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.75
(59 verses)
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Sanskrit Text
तस्य
विक्षिपतश्चापं
श्रुतकीर्तेर्महात्मनः
।
चिच्छेद
समरे
राजञ्जयत्सेनः
सुतस्तव
।
क्षुरप्रेण
सुतीक्ष्णेन
प्रहसन्निव
भारत
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तस्य | विक्षिप् + चाप | श्रुतकीर्तेर् | महात्मनः
चिछेद | समरे | राजञ् | जयत्सेनः | सुत + त्वद्
क्षुरप्रेण | सु + तीक्ष्ण | प्रहसन्न् | इव | भारत
चिछेद | समरे | राजञ् | जयत्सेनः | सुत + त्वद्
क्षुरप्रेण | सु + तीक्ष्ण | प्रहसन्न् | इव | भारत