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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.64
(18 verses)
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Sanskrit Text
शिरसा
ते
दिवं
व्याप्तं
बाहुभ्यां
पृथिवी
धृता
।
जठरं
ते
त्रयो
लोकाः
पुरुषोऽसि
सनातनः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
शिरसा | ते | दिवं | व्याप्तं | बाहुभ्यां | पृथिवी | धृता
जठरं | ते | त्रयो | लोकाः | पुरुषो | ऽसि | सनातनः
जठरं | ते | त्रयो | लोकाः | पुरुषो | ऽसि | सनातनः