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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.58
(61 verses)
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Sanskrit Text
नानारूपाणि
शस्त्राणि
विसृजन्तो
विशां
पते
।
अभ्यवर्तन्त
संहृष्टाः
परस्परवधैषिणः
।
ते
वै
समीयुः
संग्रामे
राजन्दुर्मन्त्रिते
तव
॥
Padaccheda (Word Analysis)
नाना + रूप | शस्त्राणि | विसृजन्तो | विशां | पते
न्यपातयन्त | संहृष्टाः | परस्पर + कृ + आगस्
ते | वै | समीयुः | संग्रामे | राजन् | दुर्मन्त्रिते | तव
न्यपातयन्त | संहृष्टाः | परस्पर + कृ + आगस्
ते | वै | समीयुः | संग्रामे | राजन् | दुर्मन्त्रिते | तव