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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.50
(115 verses)
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Sanskrit Text
भीमसेनश्चरन्मार्गान्सुबहून्प्रत्यदृश्यत
।
भ्रान्तमुद्भ्रान्तमाविद्धमाप्लुतं
प्रसृतं
सृतम्
।
संपातं
समुदीर्यं
च
दर्शयामास
पाण्डवः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
भीमसेन + चर् + मार्ग | सु + बहु | प्रत्यदृश्यत
भ्रान्तम् | उद्भ्रान्तम् | आविद्धम् | आप्लुतं | प्रसृतं | सृतम्
संपातं | समुदीर्यं | च | दर्शयामास | पाण्डवः
भ्रान्तम् | उद्भ्रान्तम् | आविद्धम् | आप्लुतं | प्रसृतं | सृतम्
संपातं | समुदीर्यं | च | दर्शयामास | पाण्डवः