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Currently viewing: Parva 6 - Chapter 6.46 (56 verses)
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Chapter 6.46

कृतेऽवहारे सैन्यानां प्रथमे भरतर्षभ भीष्मे युधि संरब्धे हृष्टे दुर्योधने तथा
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अवहारम् | अकुर्वन्त | सैन्यानां | भरत + ऋषभ
भीष्मे | च | युधि | संरब्धे | हृष्टे | दुर्योधने | तथा
धर्मराजस्ततस्तूर्णमभिगम्य जनार्दनम् भ्रातृभिः सहितः सर्वैः सर्वैश्चैव जनेश्वरैः
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धर्मराज + ततस् + तूर्णम् | अभिगम्य | जनार्दनम्
भ्रातृभिः | सहितः | सर्वैः | सर्व + च + एव | जनेश्वरैः
शुचा परमया युक्तश्चिन्तयानः पराजयम् वार्ष्णेयमब्रवीद्राजन्दृष्ट्वा भीष्मस्य विक्रमम्
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शुचा | परमया | युज् + चिन्तय् | पराजयम्
वार्ष्णेयम् | अब्रवीद् | राजन् | दृष्ट्वा | भीष्मस्य | विक्रमम्
कृष्ण पश्य महेष्वासं भीष्मं भीमपराक्रमम् शरैर्दहन्तं सैन्यं मे ग्रीष्मे कक्षमिवानलम्
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कृष्ण | पश्य | महत् + इष्वास | भीष्मं | भीम + पराक्रम
शरैर् | दहन्तं | सैन्यं | मे | ग्रीष्मे | कक्षम् | इव + अनल
कथमेनं महात्मानं शक्ष्यामः प्रतिवीक्षितुम् लेलिह्यमानं सैन्यं मे हविष्मन्तमिवानलम्
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कथम् | एनं | महात्मानं | शक्ष्यामः | प्रतिवीक्षितुम्
शरैर् | दहन्तं | सैन्यं | मे | ग्रीष्मे | कक्षम् | इव + अनल
एतं हि पुरुषव्याघ्रं धनुष्मन्तं महाबलम् दृष्ट्वा विप्रद्रुतं सैन्यं मदीयं मार्गणाहतम्
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एतं | हि | पुरुष + व्याघ्र | धनुष्मन्तं | महत् + बल
दृष्ट्वा | विप्रद्रुतं | सैन्यं | मदीयं | मार्गण + आहन्
शक्यो जेतुं यमः क्रुद्धो वज्रपाणिश्च संयुगे वरुणः पाशभृच्चापि कुबेरो वा गदाधरः
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शक्यो | जेतुं | यमः | क्रुद्धो | वज्रपाणि + च | संयुगे
वरुणः | पाशभृत् + च + अपि | कुबेरो | वा | गदा + धर
तु भीष्मो महातेजाः शक्यो जेतुं महाबलः सोऽहमेवं गते मग्नो भीष्मागाधजलेऽप्लवः
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न | तु | भीष्मो | महत् + तेजस् | शक्यो | जेतुं | महत् + बल
सो | ऽहम् | एवं | गते | मग्नो | भीष्म + अगाध + जल | अ + प्लव
आत्मनो बुद्धिदौर्बल्याद्भीष्ममासाद्य केशव वनं यास्यामि गोविन्द श्रेयो मे तत्र जीवितुम्
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आत्मनो | बुद्धि + दौर्बल्य | भीष्मम् | आसाद्य | केशव
वनं | यास्यामि | गोविन्द | श्रेयो | मे | तत्र | जीवितुम्
त्विमान्पृथिवीपालान्दातुं भीष्माय मृत्यवे क्षपयिष्यति सेनां मे कृष्ण भीष्मो महास्त्रवित्
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न | तु + इदम् | पृथिवीपालान् | दातुं | भीष्माय | मृत्यवे
क्षपयिष्यति | सेनां | मे | कृष्ण | भीष्मो | महत् + अस्त्र + विद्
यथानलं प्रज्वलितं पतंगाः समभिद्रुताः विनाशायैव गच्छन्ति तथा मे सैनिको जनः
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यथा + अनल | प्रज्वलितं | पतंगाः | समभिद्रुताः
विनाश + एव | गच्छन्ति | तथा | मे | सैनिको | जनः
क्षयं नीतोऽस्मि वार्ष्णेय राज्यहेतोः पराक्रमी भ्रातरश्चैव मे वीराः कर्शिताः शरपीडिताः
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क्षयं | नीतो | ऽस्मि | वार्ष्णेय | राज्य + हेतु | पराक्रमी
भ्रातृ + च + एव | मे | वीराः | कर्शिताः | शर + पीडय्
मत्कृते भ्रातृसौहार्दाद्राज्याद्भ्रष्टास्तथा सुखात् जीवितं बहु मन्येऽहं जीवितं ह्यद्य दुर्लभम्
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मद् + कृते | भ्रातृ + सौहार्द | राज्याद् | भ्रंश् + तथा | सुखात्
जीवितं | बहु | मन्ये | ऽहं | जीवितं | हि + अद्य | दुर्लभम्
जीवितस्य हि शेषेण तपस्तप्स्यामि दुश्चरम् घातयिष्यामि रणे मित्राणीमानि केशव
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जीवितस्य | हि | शेषेण | तपस् + तप् | दुश्चरम्
न | घातयिष्यामि | रणे | मित्र + इदम् | केशव
रथान्मे बहुसाहस्रान्दिव्यैरस्त्रैर्महाबलः घातयत्यनिशं भीष्मः प्रवराणां प्रहारिणाम्
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रथ + मद् | बहु + साहस्र | दिव्यैर् | अस्त्रैर् | महत् + बल
घातय् + अनिशम् | भीष्मः | प्रवराणां | प्रहारिणाम्
किं नु कृत्वा कृतं मे स्याद्ब्रूहि माधव माचिरम् मध्यस्थमिव पश्यामि समरे सव्यसाचिनम्
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किं | नु | कृत्वा | कृतं | मे | स्याद् | ब्रूहि | माधव | माचिरम्
मध्यस्थम् | इव | पश्यामि | समरे | सव्यसाचिनम्
एको भीमः परं शक्त्या युध्यत्येष महाभुजः केवलं बाहुवीर्येण क्षत्रधर्ममनुस्मरन्
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एको | भीमः | परं | शक्त्या | युध् + एतद् | महत् + भुज
केवलं | बाहु + वीर्य | क्षत्र + धर्म | अनुस्मरन्
गदया वीरघातिन्या यथोत्साहं महामनाः करोत्यसुकरं कर्म गजाश्वरथपत्तिषु
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गदया | वीर + घातिन् | यथोत्साहं | महामनाः
कृ + असुकर | कर्म | गज + अश्व + रथ + पत्ति
नालमेष क्षयं कर्तुं परसैन्यस्य मारिष आर्जवेनैव युद्धेन वीर वर्षशतैरपि
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न + अलम् | एष | क्षयं | कर्तुं | पर + सैन्य | मारिष
आर्जव + एव | युद्धेन | वीर | वर्ष + शत | अपि
एकोऽस्त्रवित्सखा तेऽयं सोऽप्यस्मान्समुपेक्षते निर्दह्यमानान्भीष्मेण द्रोणेन महात्मना
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एको | अस्त्र + विद् | सखा | ते | ऽयं | सो | अपि + मद् | समुपेक्षते
निर्दह्यमानान् | भीष्मेण | द्रोणेन | च | महात्मना
दिव्यान्यस्त्राणि भीष्मस्य द्रोणस्य महात्मनः धक्ष्यन्ति क्षत्रियान्सर्वान्प्रयुक्तानि पुनः पुनः
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निर्दह्यमानान् | भीष्मेण | द्रोणेन | च | महात्मना
धक्ष्यन्ति | क्षत्रियान् | सर्वान् | प्रयुक्तानि | पुनः | पुनः
कृष्ण भीष्मः सुसंरब्धः सहितः सर्वपार्थिवैः क्षपयिष्यति नो नूनं यादृशोऽस्य पराक्रमः
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कृष्ण | भीष्मः | सु + संरभ् | सहितः | सर्व + पार्थिव
क्षपयिष्यति | नो | नूनं | यादृशो | ऽस्य | पराक्रमः
त्वं पश्य महेष्वासं योगीष्वर महारथम् यो भीष्मं शमयेत्संख्ये दावाग्निं जलदो यथा
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कृष्ण | पश्य | महत् + इष्वास | भीष्मं | भीम + पराक्रम
यो | भीष्मं | शमयेत् | संख्ये | दाव + अग्नि | जलदो | यथा
तव प्रसादाद्गोविन्द पाण्डवा निहतद्विषः स्वराज्यमनुसंप्राप्ता मोदिष्यन्ति सबान्धवाः
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तव | प्रसादाद् | गोविन्द | पाण्डवा | निहन् + द्विष्
स्व + राज्य | अनुसंप्राप्ता | मोदिष्यन्ति | स + बान्धव
एवमुक्त्वा ततः पार्थो ध्यायन्नास्ते महामनाः चिरमन्तर्मना भूत्वा शोकोपहतचेतनः
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एवम् | उक्त्वा | ततः | पार्थो | ध्यायन्न् | आस्ते | महामनाः
चिरम् | अन्तर्मना | भूत्वा | शोक + उपहन् + चेतना
शोकार्तं पाण्डवं ज्ञात्वा दुःखेन हतचेतसम् अब्रवीत्तत्र गोविन्दो हर्षयन्सर्वपाण्डवान्
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शोक + आर्त | पाण्डवं | ज्ञात्वा | दुःखेन | हन् + चेतस्
अब्रवीत् | तत्र | गोविन्दो | हर्षयन् | सर्व + पाण्डव
मा शुचो भरतश्रेष्ठ त्वं शोचितुमर्हसि यस्य ते भ्रातरः शूराः सर्वलोकस्य धन्विनः
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मा | शुचो | भरत + श्रेष्ठ | न | त्वं | शोचितुम् | अर्हसि
यस्य | ते | भ्रातरः | शूराः | सर्व + लोक | धन्विनः
अहं प्रियकृद्राजन्सात्यकिश्च महारथः विराटद्रुपदौ वृद्धौ धृष्टद्युम्नश्च पार्षतः
Then the sons of Draupadi, the mighty carwarrior the son of Subhadra, and Nakula, Sahadeva and Dhrishtadyumna the son of Prishata.
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अहं | च | प्रिय + कृत् | राजन् | सात्यकि + च | महत् + रथ
नकुलः | सहदेव + च | धृष्टद्युम्न + च | पार्षतः
तथैव सबलाः सर्वे राजानो राजसत्तम त्वत्प्रसादं प्रतीक्षन्ते त्वद्भक्ताश्च विशां पते
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तथा + एव | स + बल | सर्वे | राजानो | राजन् + सत्तम
त्वद् + प्रसाद | प्रतीक्षन्ते | त्वद् + भक्त + च | विशां | पते
एष ते पार्षतो नित्यं हितकामः प्रिये रतः सेनापत्यमनुप्राप्तो धृष्टद्युम्नो महाबलः शिखण्डी महाबाहो भीष्मस्य निधनं किल
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एष | ते | पार्षतो | नित्यं | हित + काम | प्रिये | रतः
सेनापत्यम् | अनुप्राप्तो | धृष्टद्युम्नो | महत् + बल
शिखण्डी | च | महत् + बाहु | भीष्मस्य | निधनं | किल
एतच्छ्रुत्वा ततो राजा धृष्टद्युम्नं महारथम् अब्रवीत्समितौ तस्यां वासुदेवस्य शृण्वतः
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एतद् + श्रु | ततो | राजा | धृष्टद्युम्नं | महत् + रथ
अब्रवीत् | समितौ | तस्यां | वासुदेवस्य | शृण्वतः
धृष्टद्युम्न निबोधेदं यत्त्वा वक्ष्यामि मारिष नातिक्रम्यं भवेत्तच्च वचनं मम भाषितम्
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धृष्टद्युम्न | निबुध् + इदम् | यत् | त्वा | वक्ष्यामि | मारिष
न + अतिक्रम् | भवेत् | तद् + च | वचनं | मम | भाषितम्
भवान्सेनापतिर्मह्यं वासुदेवेन संमतः कार्त्तिकेयो यथा नित्यं देवानामभवत्पुरा तथा त्वमपि पाण्डूनां सेनानीः पुरुषर्षभ
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भवान् | सेनापतिर् | मह्यं | वासुदेवेन | संमतः
कार्त्तिकेयो | यथा | नित्यं | देवानाम् | अभवत् | पुरा
तथा | त्वम् | अपि | पाण्डूनां | सेनानीः | पुरुष + ऋषभ
त्वं पुरुषशार्दूल विक्रम्य जहि कौरवान् अहं त्वानुयास्यामि भीमः कृष्णश्च मारिष
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स | त्वं | पुरुष + शार्दूल | विक्रम्य | जहि | कौरवान्
अहं | च | त्वद् + अनुया | भीमः | कृष्ण + च | मारिष
माद्रीपुत्रौ सहितौ द्रौपदेयाश्च दंशिताः ये चान्ये पृथिवीपालाः प्रधानाः पुरुषर्षभ
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माद्री + पुत्र | च | सहितौ | द्रौपदेय + च | दंशिताः
ये | च + अन्य | पृथिवीपालाः | प्रधानाः | पुरुष + ऋषभ
तत उद्धर्षयन्सर्वान्धृष्टद्युम्नोऽभ्यभाषत अहं द्रोणान्तकः पार्थ विहितः शंभुना पुरा
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तत | उद्धर्षयन् | सर्वान् | धृष्टद्युम्नो | ऽभ्यभाषत
अहं | द्रोण + अन्तक | पार्थ | विहितः | शंभुना | पुरा
रणे भीष्मं तथा द्रोणं कृपं शल्यं जयद्रथम् सर्वानद्य रणे दृप्तान्प्रतियोत्स्यामि पार्थिव
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एष | भीष्मं | तथा | द्रोणं | गौतमं | शल्यम् | एव | च
सर्वान् | अद्य | रणे | दृप्तान् | प्रतियोत्स्यामि | पार्थिव
अथोत्क्रुष्टं महेष्वासैः पाण्डवैर्युद्धदुर्मदैः समुद्यते पार्थिवेन्द्रे पार्षते शत्रुसूदने
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अथ + उत्क्रुश् | महत् + इष्वास | पाण्डवैर् | युद्ध + दुर्मद
समुद्यते | पार्थिव + इन्द्र | पार्षते | शत्रु + सूदन
तमब्रवीत्ततः पार्थः पार्षतं पृतनापतिम् व्यूहः क्रौञ्चारुणो नाम सर्वशत्रुनिबर्हणः
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तम् | अब्रवीत् | ततः | पार्थः | पार्षतं | पृतना + पति
व्यूहः | क्रौञ्च + अरुण | नाम | सर्व + शत्रु + निबर्हण
यं बृहस्पतिरिन्द्राय तदा देवासुरेऽब्रवीत् तं यथावत्प्रतिव्यूह परानीकविनाशनम् अदृष्टपूर्वं राजानः पश्यन्तु कुरुभिः सह
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यं | बृहस्पतिर् | इन्द्राय | तदा | देवासुरे | ऽब्रवीत्
तं | यथावत् | प्रतिव्यूह | पर + अनीक + विनाशन
अ + दृश् + पूर्व | राजानः | पश्यन्तु | कुरुभिः | सह
तथोक्तः नृदेवेन विष्णुर्वज्रभृता इव प्रभाते सर्वसैन्यानामग्रे चक्रे धनंजयम्
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तथा + वच् | स | नृदेवेन | विष्णुर् | वज्रभृता | इव
प्रभाते | सर्व + सैन्य | अग्रे | चक्रे | धनंजयम्
आदित्यपथगः केतुस्तस्याद्भुतमनोरमः शासनात्पुरुहूतस्य निर्मितो विश्वकर्मणा
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आदित्य + पथ + ग | केतु + तद् + अद्भुत + मनोरम
शासनात् | पुरुहूतस्य | निर्मितो | विश्वकर्मणा
इन्द्रायुधसवर्णाभिः पताकाभिरलंकृतः आकाशग इवाकाशे गन्धर्वनगरोपमः नृत्यमान इवाभाति रथचर्यासु मारिष
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इन्द्रायुध + सवर्ण | पताकाभिर् | अलंकृतः
आकाश + ग | इव + आकाश | गन्धर्वनगर + उपम
नृत्यमान | इव + आभा | रथ + चर्या | मारिष
तेन रत्नवता पार्थः गाण्डीवधन्वना बभूव परमोपेतः स्वयंभूरिव भानुना
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तेन | रत्नवता | पार्थः | स | च | गाण्डीवधन्वना
बभूव | परम + उपे | स्वयंभूर् | इव | भानुना
शिरोऽभूद्द्रुपदो राजा महत्या सेनया वृतः कुन्तिभोजश्च चैद्यश्च चक्षुष्यास्तां जनेश्वर
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शिरो | ऽभूद् | द्रुपदो | राजा | महत्या | सेनया | वृतः
कुन्तिभोज + च | चैद्य + च | चक्षुस् + अस् | जनेश्वर
दाशार्णकाः प्रयागाश्च दाशेरकगणैः सह अनूपगाः किराताश्च ग्रीवायां भरतर्षभ
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दाशार्णकाः | प्रयाग + च | दाशेरक + गण | सह
अनूप + ग | किरात + च | ग्रीवायां | भरत + ऋषभ
पटच्चरैश्च हुण्डैश्च राजन्पौरवकैस्तथा निषादैः सहितश्चापि पृष्ठमासीद्युधिष्ठिरः
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पटच्चर + च | हुण्ड + च | राजन् | पौरवक + तथा
निषादैः | सहित + च + अपि | पृष्ठम् | आसीद् | युधिष्ठिरः
पक्षौ तु भीमसेनश्च धृष्टद्युम्नश्च पार्षतः द्रौपदेयाभिमन्युश्च सात्यकिश्च महारथः
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नकुलः | सहदेव + च | धृष्टद्युम्न + च | पार्षतः
अहं | च | प्रिय + कृत् | राजन् | सात्यकि + च | महत् + रथ
पिशाचा दरदाश्चैव पुण्ड्राः कुण्डीविषैः सह मडका लडकाश्चैव तङ्गणाः परतङ्गणाः
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पिशाचा | दरद + च + एव | पुण्ड्राः | कुण्डीविषैः | सह
मडका | लडक + च + एव | तङ्गणाः | परतङ्गणाः
बाह्लिकास्तित्तिराश्चैव चोलाः पाण्ड्याश्च भारत एते जनपदा राजन्दक्षिणं पक्षमाश्रिताः
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बाह्लिक + तित्तिर + च + एव | चोलाः | पाण्ड्य + च | भारत
एते | जनपदा | राजन् | दक्षिणं | पक्षम् | आश्रिताः
अग्निवेष्या जगत्तुण्डाः पलदाशाश्च भारत शबरास्तुम्बुपाश्चैव वत्साश्च सह नाकुलैः नकुलः सहदेवश्च वामं पार्श्वं समाश्रिताः
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अग्निवेश्या | जगत्तुण्डाः | पलदाश + च | भारत
शबरास् | तुम्बुप + च + एव | वत्स + च | सह | नाकुलैः
नकुलः | सहदेव + च | धृष्टद्युम्न + च | पार्षतः
रथानामयुतं पक्षौ शिरश्च नियुतं तथा पृष्ठमर्बुदमेवासीत्सहस्राणि विंशतिः ग्रीवायां नियुतं चापि सहस्राणि सप्ततिः
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रथानाम् | अयुतं | पक्षौ | शिरस् + च | नियुतं | तथा
पृष्ठम् | अर्बुदम् | एव + अस् | सहस्राणि | च | विंशतिः
ग्रीवायां | नियुतं | च + अपि | सहस्राणि | च | सप्ततिः
पक्षकोटिप्रपक्षेषु पक्षान्तेषु वारणाः जग्मुः परिवृता राजंश्चलन्त इव पर्वताः
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पक्ष + कोटि + प्रपक्ष | पक्ष + अन्त | च | वारणाः
जग्मुः | परिवृता | राजन् + चल् | इव | पर्वताः
जघनं पालयामास विराटः सह केकयैः काशिराजश्च शैब्यश्च रथानामयुतैस्त्रिभिः
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जघनं | पालयामास | विराटः | सह | केकयैः
काशिराज + च | शैब्य + च | रथानाम् | अयुत + त्रि
एवमेतं महाव्यूहं व्यूह्य भारत पाण्डवाः सूर्योदयनमिच्छन्तः स्थिता युद्धाय दंशिताः
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एवम् | एतं | महत् + व्यूह | व्यूह्य | भारत | पाण्डवाः
सूर्य + उदयन | इच्छन्तः | स्थिता | युद्धाय | दंशिताः
तेषामादित्यवर्णानि विमलानि महान्ति श्वेतच्छत्राण्यशोभन्त वारणेषु रथेषु
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तेषाम् | आदित्य + वर्ण | विमलानि | महान्ति | च
श्वेत + छत्त्र + शुभ् | वारणेषु | रथेषु | च