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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.45
(63 verses)
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Sanskrit Text
अग्निनेव
प्रदग्धानि
वनानि
शिशिरात्यये
।
शरदग्धान्यदृश्यन्त
सैन्यानि
द्रुपदस्य
ह
।
अतिष्ठत
रणे
भीष्मो
विधूम
इव
पावकः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अग्नि + इव | प्रदग्धानि | वनानि | शिशिरात्यये
शर + दह् + दृश् | सैन्यानि | द्रुपदस्य | ह
अतिष्ठत | रणे | भीष्मो | विधूम | इव | पावकः
शर + दह् + दृश् | सैन्यानि | द्रुपदस्य | ह
अतिष्ठत | रणे | भीष्मो | विधूम | इव | पावकः