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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.45
(63 verses)
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Sanskrit Text
तत्रार्जुनः
संत्वरितः
शङ्खस्यासीत्पुरःसरः
।
भीष्माद्रक्ष्योऽयमद्येति
ततो
युद्धमवर्तत
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तत्र + अर्जुन | संत्वरितः | शङ्ख + अस् | पुरःसरः
भीष्माद् | रक्ष्यो | ऽयम् | अद्य + इति | ततो | युद्धम् | अवर्तत
भीष्माद् | रक्ष्यो | ऽयम् | अद्य + इति | ततो | युद्धम् | अवर्तत