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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.43
(83 verses)
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Sanskrit Text
धृष्टद्युम्नस्ततो
द्रोणमभ्यद्रवत
भारत
।
तस्य
द्रोणः
सुसंक्रुद्धः
परासुकरणं
दृढम्
।
त्रिधा
चिच्छेद
समरे
यतमानस्य
कार्मुकम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
धृष्टद्युम्न + ततस् | द्रोणम् | अभ्यद्रवत | भारत
तस्य | द्रोणः | सु + संक्रुध् | परासु + करण | दृढम्
त्रिधा | चिछेद | समरे | यतमानस्य | कार्मुकम्
तस्य | द्रोणः | सु + संक्रुध् | परासु + करण | दृढम्
त्रिधा | चिछेद | समरे | यतमानस्य | कार्मुकम्