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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.20
(20 verses)
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Sanskrit Text
महारथौघविपुलः
समुद्र
इव
पर्वणि
।
भीष्मेण
धार्तराष्ट्राणां
व्यूहः
प्रत्यङ्मुखो
युधि
॥
Padaccheda (Word Analysis)
महत् + रथ + ओघ + विपुल | समुद्र | इव | पर्वणि
भीष्मेण | धार्तराष्ट्राणां | व्यूहः | प्रत्यङ्मुखो | युधि
भीष्मेण | धार्तराष्ट्राणां | व्यूहः | प्रत्यङ्मुखो | युधि