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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.13
(50 verses)
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Sanskrit Text
अष्टपञ्चाशतं
राजन्विपुलत्वेन
चानघ
।
श्रूयते
परमोदारः
पतंगोऽसौ
विभावसुः
।
एतत्प्रमाणमर्कस्य
निर्दिष्टमिह
भारत
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अष्टन् + पञ्चाशत् | राजन् | विपुल + त्व | च + अनघ
श्रूयते | परम + उदार | पतंगो | ऽसौ | विभावसुः
एतत् | प्रमाणम् | अर्कस्य | निर्दिष्टम् | इह | भारत
श्रूयते | परम + उदार | पतंगो | ऽसौ | विभावसुः
एतत् | प्रमाणम् | अर्कस्य | निर्दिष्टम् | इह | भारत