Verse 1
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कथं
शिखण्डी
गाङ्गेयमभ्यवर्तत
संयुगे
।
पाण्डवाश्च
तथा
भीष्मं
तन्ममाचक्ष्व
संजय
॥
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कथं | शिखण्डी | गाङ्गेयम् | अभ्यवर्तत | संयुगे
पाण्डव + च | तथा | भीष्मं | तद् + मद् + आचक्ष् | संजय
पाण्डव + च | तथा | भीष्मं | तद् + मद् + आचक्ष् | संजय