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Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.44
(24 verses)
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Sanskrit Text
येऽस्मिँल्लोके
विजयन्तीह
कामा;न्ब्राह्मीं
स्थितिमनुतितिक्षमाणाः
।
त
आत्मानं
निर्हरन्तीह
देहा;न्मुञ्जादिषीकामिव
सत्त्वसंस्थाः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ये | ऽस्मिंल् | लोके | विजि + इह | कामान् | ब्राह्मीं | स्थितिम् | अनुतितिक्षमाणाः
त | आत्मानं | निर्हृ + इह | देहान् | मुञ्जाद् | इषीकाम् | इव | सत्त्व + संस्थ
त | आत्मानं | निर्हृ + इह | देहान् | मुञ्जाद् | इषीकाम् | इव | सत्त्व + संस्थ