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Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.30
(47 verses)
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Sanskrit Text
कच्चिद्वृत्तिर्वर्तते
वै
पुराणी;
कच्चिद्भोगान्धार्तराष्ट्रो
ददाति
।
अङ्गहीनान्कृपणान्वामनांश्च;
आनृशंस्याद्धृतराष्ट्रो
बिभर्ति
॥
Padaccheda (Word Analysis)
कच्चिद् | वृत्तिर् | वर्तते | वै | पुराणी | कच्चिद् | भोगान् | धार्तराष्ट्रो | ददाति
अङ्ग + हा | कृपणान् | वामन + च | आनृशंस्याद् | धृतराष्ट्रो | बिभर्ति
अङ्ग + हा | कृपणान् | वामन + च | आनृशंस्याद् | धृतराष्ट्रो | बिभर्ति