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Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.163
(22 verses)
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Sanskrit Text
व्यलीकं
पाण्डवेयेन
भीमसेनानुजेन
ह
।
दिशो
विजयता
राजञ्श्वेतवाहेन
भारत
॥
Padaccheda (Word Analysis)
व्यलीकं | पाण्डवेयेन | भीमसेन + अनुज | ह
दिशो | विजयता | राजञ् | श्वेतवाहेन | भारत
दिशो | विजयता | राजञ् | श्वेतवाहेन | भारत