Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.152
(31 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
गजैर्मत्तैः
समाकीर्णं
सवर्मायुधकोशकैः
।
तद्बभूव
बलं
राजन्कौरव्यस्य
सहस्रशः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
गजैर् | मत्तैः | समाकीर्णं | स + वर्मन् + आयुध + कोशक
तद् | बभूव | बलं | राजन् | कौरव्यस्य | सहस्रशः
तद् | बभूव | बलं | राजन् | कौरव्यस्य | सहस्रशः