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Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.148
(19 verses)
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Sanskrit Text
उक्तं
भीष्मेण
यद्वाक्यं
द्रोणेन
विदुरेण
च
।
गान्धार्या
धृतराष्ट्रेण
समक्षं
मम
भारत
।
एतत्ते
कथितं
राजन्यद्वृत्तं
कुरुसंसदि
॥
Padaccheda (Word Analysis)
माता + पितृ | भीष्मेण | द्रोणेन | विदुरेण | च
गान्धार्या | धृतराष्ट्रेण | न | च | मन्दो | ऽन्वबुध्यत
प्रत्यक्षम् | एतद् | भवतां | यद् | वृत्तं | कुरु + संसद्
गान्धार्या | धृतराष्ट्रेण | न | च | मन्दो | ऽन्वबुध्यत
प्रत्यक्षम् | एतद् | भवतां | यद् | वृत्तं | कुरु + संसद्