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Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.132
(40 verses)
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Sanskrit Text
यदि
कृत्यं
न
पश्यामि
तवाद्येह
यथा
पुरा
।
श्लाघनीयं
यशस्यं
च
का
शान्तिर्हृदयस्य
मे
॥
Padaccheda (Word Analysis)
यदि | कृत्यं | न | पश्यामि | त्वद् + अद्य + इह | यथा | पुरा
यदि + मद् | तं | न | पश्यामि | का | शान्तिर् | हृदयस्य | मे
यदि + मद् | तं | न | पश्यामि | का | शान्तिर् | हृदयस्य | मे