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Currently viewing: Parva 4 -
Chapter 4.64
(37 verses)
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Sanskrit Text
अकार्यं
ते
कृतं
राजन्क्षिप्रमेव
प्रसाद्यताम्
।
मा
त्वा
ब्रह्मविषं
घोरं
समूलमपि
निर्दहेत्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अकार्यं | ते | कृतं | राजन् | क्षिप्रम् | एव | प्रसाद्यताम्
मा | त्वा | ब्रह्मन् + विष | घोरं | स + मूल | अपि | निर्दहेत्
मा | त्वा | ब्रह्मन् + विष | घोरं | स + मूल | अपि | निर्दहेत्