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Currently viewing: Parva 4 -
Chapter 4.48
(23 verses)
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Sanskrit Text
उत्सृज्य
रथवंशं
तु
प्रयाते
श्वेतवाहने
।
अभिप्रायं
विदित्वास्य
द्रोणो
वचनमब्रवीत्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
उत्सृज्य | रथ + वंश | तु | प्रयाते | श्वेतवाहने
अभिप्रायं | विद् + इदम् | द्रोणो | वचनम् | अब्रवीत्
अभिप्रायं | विद् + इदम् | द्रोणो | वचनम् | अब्रवीत्