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Currently viewing: Parva 4 -
Chapter 4.44
(22 verses)
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Sanskrit Text
एकान्ते
पार्थमासीनं
कूपेऽग्निमिव
संवृतम्
।
अज्ञानादभ्यवस्कन्द्य
प्राप्ताः
स्मो
भयमुत्तमम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सो | अन्तःपुर + गम् | पार्थः | कूपे | ऽग्निर् | इव | संवृतः
अज्ञानाद् | अभ्यवस्कन्द्य | प्राप्ताः | स्मो | भयम् | उत्तमम्
अज्ञानाद् | अभ्यवस्कन्द्य | प्राप्ताः | स्मो | भयम् | उत्तमम्