Vidya Kendra
Mahābhārata
Home Introduction Reader Glossary All Resources
Vidyakendra
Vidyakendra Home

Navigate to Verse

Currently viewing: Parva 4 - Chapter 4.10 (13 verses)
Powered by Aksharamukha

Search Mahābhārata

Try searching for: dharma, युद्ध, Arjuna, 1.1.5 (verse reference)
Quick Navigation: Start Browse Parvas
❖ ❖ ❖

Chapter 4.10

अथापरोऽदृश्यत रूपसंपदा; स्त्रीणामलंकारधरो बृहत्पुमान् प्राकारवप्रे प्रतिमुच्य कुण्डले; दीर्घे कम्बू परिहाटके शुभे
Vaishampayana said Then there was seen at the gate of the ramparts another person of colossal form, rich in the wealth of beauty, adorned with the ornaments of woman, and putting on large earrings and fine conch bracelets set with gold.
View Padaccheda
अथ + अपर | ऽदृश्यत | रूप + सम्पद् | स्त्रीणाम् | अलंकार + धर | बृहत् + पुंस्
प्राकार + वप्र | प्रतिमुच्य | कुण्डले | दीर्घे | च | कम्बू | परिहाटके | शुभे
बहूंश्च दीर्घांश्च विकीर्य मूर्धजा;न्महाभुजो वारणमत्तविक्रमः गतेन भूमिमभिकम्पयंस्तदा; विराटमासाद्य सभासमीपतः
That long armed one, having the gait like that of an elephant, with long and abundant tissues hanging about, came to Virata shaking the earth with his tread and stood in his court.
View Padaccheda
बहु + च | दीर्घ + च | विकीर्य | मूर्धजान् | महत् + भुज | वारण + मद् + विक्रम
गतेन | भूमिम् | अभिकम्पय् + तदा | विराटम् | आसाद्य | सभा + समीपतस्
तं प्रेक्ष्य राजोपगतं सभातले; सत्रप्रतिच्छन्नमरिप्रमाथिनम् विराजमानं परमेण वर्चसा; सुतं महेन्द्रस्य गजेन्द्रविक्रमम्
View Padaccheda
तं | प्रेक्ष्य | राजन् + उपगम् | सभा + तल | सत्त्र + प्रतिच्छद् | अरि + प्रमाथिन्
विराजमानं | परमेण | वर्चसा | सुतं | महत् + इन्द्र | गज + इन्द्र + विक्रम
सर्वानपृच्छच्च समीपचारिणः; कुतोऽयमायाति मे पुरा श्रुतः चैनमूचुर्विदितं तदा नराः; सविस्मितं वाक्यमिदं नृपोऽब्रवीत्
View Padaccheda
सर्वान् | प्रच्छ् + च | समीप + चारिन् | कुतो | ऽयम् | आयाति | न | मे | पुरा | श्रुतः
न | च + एनद् | ऊचुर् | विदितं | तदा | नराः | स + विस्मित | वाक्यम् | इदं | नृपो | ऽब्रवीत्
सर्वोपपन्नः पुरुषो मनोरमः; श्यामो युवा वारणयूथपोपमः विमुच्य कम्बू परिहाटके शुभे; विमुच्य वेणीमपिनह्य कुण्डले
View Padaccheda
सर्व + उपपद् | पुरुषो | मनोरमः | श्यामो | युवा | वारण + यूथप + उपम
विमुच्य | कम्बू | परिहाटके | शुभे | विमुच्य | वेणीम् | अपिनह्य | कुण्डले
शिखी सुकेशः परिधाय चान्यथा; भवस्व धन्वी कवची शरी तथा आरुह्य यानं परिधावतां भवा;न्सुतैः समो मे भव वा मया समः
Endowed with might you appear like a celestials; you are are young and of dark complexion and resemble the leader of a herd of elephants. Although you have worn fine conch-bracelets beset with gold ear-rings and loosened your braid, yet you shine as one decked with garlands and fine hairs and equipped with bow, bow, mail and arrows; ascending the car you wander at your pleasure. Be you like my son or like myself.
View Padaccheda
शिखी | सु + केश | परिधाय | च + अन्यथा | भवस्व | धन्वी | कवची | शरी | तथा
आरुह्य | यानं | परिधावतां | भवान् | सुतैः | समो | मे | भव | वा | मया | समः
वृद्धो ह्यहं वै परिहारकामः; सर्वान्मत्स्यांस्तरसा पालयस्व नैवंविधाः क्लीबरूपा भवन्ति; कथंचनेति प्रतिभाति मे मनः
I am decrepit, and desirous of cast-off my burden. Rule you cheerfully the whole of the Matsya territory, I cannot believe that such persons may even be of the neuter sex.”
View Padaccheda
वृद्धो | हि + मद् | वै | परिहार + काम | सर्व + मत्स्य + तरस् | पालयस्व
न + एवंविध | क्लीब + रूप | भवन्ति | कथंचन + इति | प्रतिभाति | मे | मनः
गायामि नृत्याम्यथ वादयामि; भद्रोऽस्मि नृत्ते कुशलोऽस्मि गीते त्वमुत्तरायाः परिदत्स्व मां स्वयं; भवामि देव्या नरदेव नर्तकः
Arjuna said I sing, dance and play on instruments. I am skilled in dancing and expert in singing. O god among men, assign me to Uttara. I shall be the dancing-master to the princess.
View Padaccheda
गायामि | नृत् + अथ | वादयामि | भद्रो | ऽस्मि | नृत्ते | कुशलो | ऽस्मि | गीते
त्वम् | उत्तरायाः | परिदत्स्व | मां | स्वयं | भवामि | देव्या | नरदेव | नर्तकः
इदं तु रूपं मम येन किं नु त;त्प्रकीर्तयित्वा भृशशोकवर्धनम् बृहन्नडां वै नरदेव विद्धि मां; सुतं सुतां वा पितृमातृवर्जिताम्
It will be of no avail to describe how I have come by this form. It will merely augment my pain, O lord of men; know me to be Brihannala, a son or daughter without parents.
View Padaccheda
इदं | तु | रूपं | मम | येन | किं | नु | तत् | प्रकीर्तयित्वा | भृश + शोक + वर्धन
बृहन्नडां | वै | नरदेव | विद्धि | मां | सुतं | सुतां | वा | पितृ + मातृ + वर्जय्
ददामि ते हन्त वरं बृहन्नडे; सुतां मे नर्तय याश्च तादृशीः इदं तु ते कर्म समं मे मतं; समुद्रनेमिं पृथिवीं त्वमर्हसि
Virata said O Brihannala, I grant you the boon you seek for; instruct my daughter and those like her in dancing; me-seems this office is not worthy of you, you deserve the whole earth surrounded by seas.
View Padaccheda
ददामि | ते | हन्त | वरं | बृहन्नडे | सुतां | च | मे | नर्तय | यद् + च | तादृशीः
न | च + एव | मन्ये | तव | कर्म | तत् | समं | समुद्र + नेमि | पृथिवीं | त्वम् | अर्हसि
बृहन्नडां तामभिवीक्ष्य मत्स्यरा;ट्कलासु नृत्ते तथैव वादिते अपुंस्त्वमप्यस्य निशम्य स्थिरं; ततः कुमारीपुरमुत्ससर्ज तम्
View Padaccheda
बृहन्नडां | ताम् | अभिवीक्ष्य | मत्स्य + राज् | कलासु | नृत्ते | च | तथा + एव | वादिते
अपुंस्त्वम् | अपि + इदम् | निशम्य | च | स्थिरं | ततः | कुमारी + पुर | उत्ससर्ज | तम्
शिक्षयामास गीतवादितं; सुतां विराटस्य धनंजयः प्रभुः सखीश्च तस्याः परिचारिकास्तथा; प्रियश्च तासां बभूव पाण्डवः
View Padaccheda
स | शिक्षयामास | च | गीत + वादित | सुतां | विराटस्य | धनंजयः | प्रभुः
सखी + च | तस्याः | परिचारिका + तथा | प्रिय + च | तासां | स | बभूव | पाण्डवः
तथा सत्रेण धनंजयोऽवस;त्प्रियाणि कुर्वन्सह ताभिरात्मवान् तथागतं तत्र जज्ञिरे जना; बहिश्चरा वाप्यथ वान्तरेचराः
There the self-subdued Dhananjaya began to live in disguise behaving amiably with them. The people within or without the palace could not recognize him.
View Padaccheda
तथा | स | सत्रेण | धनंजयो | ऽवसत् | प्रियाणि | कुर्वन् | सह | ताभिर् | आत्मवान्
तथा + आगम् | तत्र | न | जज्ञिरे | जना | बहिश्चरा | वा + अपि + अथवा + अन्तर + चर