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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.83
(114 verses)
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Sanskrit Text
प्रदक्षिणमुपावृत्य
ज्येष्ठस्थानं
व्रजेन्नरः
।
अभिगम्य
महादेवं
विराजति
यथा
शशी
॥
Padaccheda (Word Analysis)
प्रदक्षिणम् | उपावृत्य | ज्येष्ठस्थानं | व्रजेन् | नरः
विमल + अशोक | आसाद्य | विराजति | यथा | शशी
विमल + अशोक | आसाद्य | विराजति | यथा | शशी