Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.83
(114 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
आज्यभागेन
वै
तत्र
तर्पितास्तु
यथाविधि
।
देवास्त्रिभुवणं
याता
ऋषयश्च
यथासुखम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
आज्य + भाग | वै | तत्र | तर्पितास् | तु | यथाविधि
देवास् | त्रिभुवनं | याता | ऋषयश् | च | यथासुखम्
देवास् | त्रिभुवनं | याता | ऋषयश् | च | यथासुखम्