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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.83
(114 verses)
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Sanskrit Text
ततः
शूर्पारकं
गच्छेज्जामदग्न्यनिषेवितम्
।
रामतीर्थे
नरः
स्नात्वा
विन्द्याद्बहु
सुवर्णकम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ततो | महेन्द्रम् | आसाद्य | जामदग्न्य + निषेव्
पिण्डारके | नरः | स्नात्वा | लभेद् | बहु | सुवर्णकम्
पिण्डारके | नरः | स्नात्वा | लभेद् | बहु | सुवर्णकम्