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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.82
(143 verses)
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Sanskrit Text
ततो
गच्छेत
ब्रह्मर्षेर्गौतमस्य
वनं
नृप
।
अहल्याया
ह्रदे
स्नात्वा
व्रजेत
परमां
गतिम्
।
अभिगम्य
श्रियं
राजन्विन्दते
श्रियमुत्तमाम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ततो | गच्छेत | धर्म + ज्ञ | ब्रह्मावर्तं | नर + अधिप
तत्र | स्नात्वा | नर + व्याघ्र | गच्छेत | परमां | गतिम्
श्रीतीर्थं | च | समासाद्य | विन्दते | श्रियम् | उत्तमाम्
तत्र | स्नात्वा | नर + व्याघ्र | गच्छेत | परमां | गतिम्
श्रीतीर्थं | च | समासाद्य | विन्दते | श्रियम् | उत्तमाम्