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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.82
(143 verses)
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Sanskrit Text
ततो
गच्छेत
राजेन्द्र
धेनुकां
लोकविश्रुताम्
।
एकरात्रोषितो
राजन्प्रयच्छेत्तिलधेनुकाम्
।
सर्वपापविशुद्धात्मा
सोमलोकं
व्रजेद्ध्रुवम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ततो | गच्छेत | धर्म + ज्ञ | प्रभासं | लोक + विश्रु
एक + रात्र + वस् | राजन् | प्रयच्छेत् | तिलधेनुकाम्
सर्व + पाप + विशुध् + आत्मन् | गम् + च | परमां | गतिम्
एक + रात्र + वस् | राजन् | प्रयच्छेत् | तिलधेनुकाम्
सर्व + पाप + विशुध् + आत्मन् | गम् + च | परमां | गतिम्