Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.81
(178 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
ततो
गच्छेत
राजेन्द्र
फलकीवनमुत्तमम्
।
यत्र
देवाः
सदा
राजन्फलकीवनमाश्रिताः
।
तपश्चरन्ति
विपुलं
बहुवर्षसहस्रकम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ततो | गच्छेत | धर्म + ज्ञ | प्रभासं | लोक + विश्रु
यत्र | देवाः | सदा | राजन् | फलकीवनम् | आश्रिताः
प्रोवाच | भरत + श्रेष्ठ | व्रतं | वर्ष + सहस्रिक
यत्र | देवाः | सदा | राजन् | फलकीवनम् | आश्रिताः
प्रोवाच | भरत + श्रेष्ठ | व्रतं | वर्ष + सहस्रिक