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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.81
(178 verses)
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Sanskrit Text
तत्र
स्नात्वार्चयित्वा
च
शूलपाणिं
वृषध्वजम्
।
सर्वपापविशुद्धात्मा
गच्छेत
परमां
गतिम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तत्र | स्ना + अर्चय् | च | रुद्रं | देव + गण | वृतम्
सर्व + पाप + विशुध् + आत्मन् | गम् + च | परमां | गतिम्
सर्व + पाप + विशुध् + आत्मन् | गम् + च | परमां | गतिम्