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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.81
(178 verses)
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Sanskrit Text
तत्रैव
च
महाराज
यक्षी
लोकपरिश्रुता
।
तां
चाभिगम्य
राजेन्द्र
पुण्याँल्लोकानवाप्नुयात्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तत्र + एव | च | महत् + राज | यक्षी | लोक + परिश्रु
तां | च + अभिगम् | राजन् + इन्द्र | पुण्य + लोक | अवाप्नुयात्
तां | च + अभिगम् | राजन् + इन्द्र | पुण्य + लोक | अवाप्नुयात्