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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.81
(178 verses)
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Sanskrit Text
अभिवाद्य
ततो
यक्षं
द्वारपालमरन्तुकम्
।
कोटिरूपमुपस्पृश्य
लभेद्बहु
सुवर्णकम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अभिवाद्य | ततो | यक्षं | द्वारपालम् | अरन्तुकम्
पिण्डारके | नरः | स्नात्वा | लभेद् | बहु | सुवर्णकम्
पिण्डारके | नरः | स्नात्वा | लभेद् | बहु | सुवर्णकम्