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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.81
(178 verses)
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Sanskrit Text
सर्वस्त्वमसि
लोकानां
कर्ता
कारयिता
च
ह
।
त्वत्प्रसादात्सुराः
सर्वे
मोदन्तीहाकुतोभयाः
।
एवं
स्तुत्वा
महादेवं
स
ऋषिः
प्रणतोऽभवत्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सर्वस् | त्वम् | असि | लोकानां | कर्ता | कारयिता | च | ह
तद् + प्रसाद | धनुर्वेदे | समपद्यन्त | पारगाः
एवं | स्तुत्वा | महादेवं | स | ऋषिः | प्रणतो | ऽभवत्
तद् + प्रसाद | धनुर्वेदे | समपद्यन्त | पारगाः
एवं | स्तुत्वा | महादेवं | स | ऋषिः | प्रणतो | ऽभवत्