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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.80
(133 verses)
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Sanskrit Text
ततो
गच्छेत
धर्मज्ञ
भीमायाः
स्थानमुत्तमम्
।
तत्र
स्नात्वा
तु
योन्यां
वै
नरो
भरतसत्तम
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ततो | गच्छेत | धर्म + ज्ञ | पुण्य + स्थान | उमापतेः
तत्र | स्नात्वा | च | पीत्वा | च | वसूनां | संमतो | भवेत्
तत्र | स्नात्वा | च | पीत्वा | च | वसूनां | संमतो | भवेत्