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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.80
(133 verses)
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Sanskrit Text
ततो
गच्छेत
धर्मज्ञ
प्रभासं
लोकविश्रुतम्
।
यत्र
संनिहितो
नित्यं
स्वयमेव
हुताशनः
।
देवतानां
मुखं
वीर
अनलोऽनिलसारथिः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ततो | गच्छेत | धर्म + ज्ञ | पुण्य + स्थान | उमापतेः
यत्र | संनिहितो | नित्यं | स्वयम् | एव | हुताशनः
देवतानां | मुखं | वीर | अनलो | अनिल + सारथि
यत्र | संनिहितो | नित्यं | स्वयम् | एव | हुताशनः
देवतानां | मुखं | वीर | अनलो | अनिल + सारथि